October 12, 2026
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प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त विद्यालयों के शीघ्र पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार ने आपदा मोचन निधि से 30 करोड़ का बजट जारी कर दिया है। साथ ही सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर आवंटित धनराशि का उपयोग शीघ्र करने कर मार्च 2027 तक उपयोगिता प्रमाण पत्र शिक्षा महानिदेशालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं।

सूबे में आपदा में क्षतिग्रस्त विद्यालय भवनों, चारदीवारी, खेल मैदान, शौचालय एवं अन्य परिसंपत्तियों का पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्य कराया जाएगा। इसके लिये राज्य सरकार ने राज्य आपदा मोचन निधि से 30 करोड़ की धनराशि जनपदवार जारी कर दी है। जिसमें प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों के लिये पृथक-पृथक 15 -15 करोड़ की धनराशि स्वीकृत हैं। इस संबंध में महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा आकांक्षा कोण्डे ने सभी जनपदों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर आवंटित धनराशि को शीघ्र व्यय करने के निर्देश दिये हैं। आपदा मोचन निधि के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालयों के लिये चमोली, पिथौरागढ़, चम्पावत, उत्तरकाशी, पौड़ी, टिहरी, रूद्रप्रयाग तथा अल्मोड़ा जनपद को 1.25-1.25 करोड़ की धनराशि जारी की है। जबकि हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर तथा ऊधमसिंह नगर जिले को 1.1 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसी प्रकार माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत चमोली, पिथौरागढ़, चम्पावत, उत्तरकाशी, पौड़ी, टिहरी, रूद्रप्रयाग तथा अल्मोड़ा जनपद को 1.25-1.25 करोड़ की धनराशि जारी की है। जबकि हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर तथा ऊधमसिंह नगर जिले को 1.1 करोड़ की धनराशि आवंटित की है।

महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा ने सभी सीईओ को आपदा मद से आवंटित धनराशि का उपयोग शीघ्र करने और मार्च 2027 तक पुनर्निर्माण एवं मरम्मत कार्य पूरे कर उपयोगिता प्रमाण पत्र शिक्षा महानिदेशालय को उपलब्ध करने के निर्देश भी दिये हैं। इसके साथ ही अधिकारियों को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है।

प्राकृतिक आपदा से क्षतिग्रस्त विद्यालयों का शीघ्र पुनर्निनिर्माण किया जायेगा। कर उन्हें सुरक्षित एवं सुचारु रूप से संचालित किया जाएगा। इसके लिये प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों के लिये जनपदवार 30 करोड़ की धनराशि जारी कर दी गई है। संबंधित अधिकारियों को पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विद्यालयों को जल्द से जल्द पूर्ववत स्वरूप में लाया जा सके। – डाॅ. धन सिंह रावत, विद्यालयी शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।

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