
देहरादून। भूख आज भी विकास की राह में एक बड़ी चुनौती है। खासकर बच्चों के लिए भूख केवल पेट की समस्या नहीं, बल्कि उनकी पढ़ाई, एकाग्रता, विद्यालय में उपस्थिति और सीखने की क्षमता को भी प्रभावित करती है। इसी चुनौती से निपटने की दिशा में अक्षय पात्र फाउंडेशन के सेवा मॉडल को समझने के लिए डिप्टी कमिश्नर (एफ ओ ए) गणेश खंडवाला के साथ उत्तराखंड शिक्षा विभाग के 49 नव नियुक्त पीसीएस अधिकारियों ने सुद्धोवाला, देहरादून स्थित संस्था की केंद्रीकृत रसोई का दौरा किया।
यह दौरा प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया, जहां भावी प्रशासकों ने प्रधानमंत्री पोषण योजना के जमीनी क्रियान्वयन को बेहद करीब से देखा। अधिकारियों ने रसोई में भोजन तैयार करने से लेकर खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता जांच, स्वच्छता, पैकिंग और विद्यालयों तक समय पर भोजन पहुंचाने की पूरी व्यवस्था का निरीक्षण किया।
एक ही रसोई से हजारों बच्चों तक भोजन…
अक्षय पात्र की केंद्रीकृत रसोई में बड़े पैमाने पर भोजन तैयार करने की आधुनिक और स्वचालित व्यवस्था ने अधिकारियों का ध्यान खींचा। अधिकारियों ने जाना कि किस तरह निर्धारित मानकों के अनुसार भोजन तैयार कर उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है और फिर उसे तय समय पर विद्यालयों तक पहुंचाया जाता है।
दौरे के दौरान सरकार और निजी संस्था की साझेदारी के माध्यम से जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने के मॉडल को भी समझाया गया। यह दौरा इस बात की तस्वीर पेश करता है कि सरकारी नीति, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और प्रतिबद्ध संस्थाओं की साझेदारी से बड़े पैमाने पर सामाजिक बदलाव लाया जा सकता है।
अक्षय पात्र वर्तमान में देशभर में 83 केंद्रीकृत रसोइयों के माध्यम से प्रतिदिन करीब 23 लाख 50 हजार भोजन बच्चों तक पहुंचा रहा है। उत्तराखंड में संस्था करीब 650 विद्यालयों के 61 हजार बच्चों को भोजन उपलब्ध करा रही है। वहीं देहरादून की केंद्रीकृत रसोई से अकेले 443 विद्यालयों में प्रतिदिन करीब 41 हजार बच्चों को भोजन पहुंचाया जाता है।
अधिकारियों ने संस्था की “गरम, पौष्टिक और स्वच्छ भोजन” उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता के साथ-साथ भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने और उसे सुरक्षित तरीके से बच्चों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को समझा।
उद्देश्य साफ है—भूख किसी बच्चे की पढ़ाई के रास्ते में दीवार न बने।

